अगर आप मध्य प्रदेश में ज़मीन के मालिक हैं, खरीदने वाले हैं, या किसी पुश्तैनी ज़मीन का इतिहास खोज रहे हैं — तो आपके लिए सबसे ज़रूरी टूल अब MP Bhulekh का नया WebGIS 2.0 पोर्टल है। पहले जो काम पटवारी या तहसील के दफ्तर में हफ़्तों लगाते थे, वही अब कुछ मिनटों में मोबाइल से हो जाता है। राज्य शासन ने पुराने पोर्टल को 2026 में पूरी तरह से अपग्रेड कर दिया है — नया पता है webgis2.mpbhulekh.gov.in, और इस बार जोड़े गए हैं ULPIN सर्च, RCMS आदेश ट्रैकिंग, व्यपवर्तन शुल्क कैलकुलेटर जैसे फ़ीचर।
MP Bhulekh — Quick Navigation
इस लेख में हम सब कुछ कवर करेंगे — पुराने और नए पोर्टल का अंतर, हर सेवा का असली उपयोग, खसरा-खतौनी निकालने के चार अलग तरीके, ULPIN की अहमियत, डिजिटल कॉपी की वैधता, और सबसे ज़रूरी — जब पोर्टल पर कुछ काम न करे तो क्या करें (वो सेक्शन जो कोई दूसरा बताता ही नहीं)।
WebGIS 2.0 असल में है क्या?
सीधी भाषा में कहें तो WebGIS 2.0 मध्य प्रदेश सरकार के भू-अभिलेख विभाग का दूसरी पीढ़ी का डिजिटल मानचित्र-आधारित प्लेटफ़ॉर्म है। इसमें “GIS” का मतलब है — Geographic Information System। यानी पुराने पोर्टल पर जहाँ सिर्फ़ टेक्स्ट में लिखा हुआ खसरा-खतौनी मिलता था, वहीं नए पोर्टल पर वही जानकारी असली नक्शे पर ओवरले होकर दिखती है। आप ज़ूम करके अपने खेत की सीमा देख सकते हैं, पड़ोसी के प्लॉट तक की दूरी नाप सकते हैं, और सैटेलाइट व्यू में अपनी ज़मीन की वर्तमान स्थिति भी देख सकते हैं।
यह पुराने mpbhulekh.gov.in का बेहतर रूप है। पुराना URL अब भी काम करता है, लेकिन वह नए सिस्टम पर रीडायरेक्ट हो जाता है। कॉपीराइट फ़ुटर पर “© 2026 O/o Commissioner of Land Records, Gwalior” साफ़ लिखा है — यानी यह पोर्टल ग्वालियर स्थित आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय के अधीन संचालित होता है।

पुराना पोर्टल vs WebGIS 2.0 — क्या-क्या बदला?
अगर आप पहले पुराने पोर्टल का इस्तेमाल कर चुके हैं, तो नया इंटरफ़ेस देखकर थोड़ी उलझन हो सकती है। नीचे टेबल में मुख्य फ़र्क़ दिए गए हैं ताकि आप तुरंत समझ सकें कि कौन सी चीज़ कहाँ शिफ़्ट हुई है:
| विशेषता | पुराना पोर्टल | WebGIS 2.0 |
|---|---|---|
| URL | mpbhulekh.gov.in | webgis2.mpbhulekh.gov.in |
| खोज विकल्प | 3 (नाम/खसरा/प्लॉट) | 4 (ULPIN जुड़ा) |
| नक्शा अनुभव | स्टैटिक PDF | इंटरैक्टिव GIS, ज़ूम-योग्य |
| हेल्पडेस्क | 18002336763 | 18002030311 (09:45 AM – 06:15 PM) |
| तकनीकी ईमेल | — | [email protected] |
| RCMS आदेश | नहीं था | हाँ — सीधे होम पेज से |
| व्यपवर्तन कैलकुलेटर | नहीं | हाँ — स्व-गणना सुविधा |
| सिविल कोर्ट केस | नहीं | व्यवहार न्यायालय प्रकरण मॉड्यूल |
पोर्टल पर मिलने वाली सभी सेवाएँ

नागरिकों की सहूलियत के हिसाब से सेवाओं को दो हिस्सों में बाँटा गया है। एक तरफ़ ऐसी सेवाएँ हैं जिन्हें कोई भी बिना अकाउंट बनाए, मुफ्त में देख सकता है। दूसरी तरफ़ कुछ सेवाएँ ऐसी हैं जिनमें पैसा लगता है और लॉगिन ज़रूरी होता है — आम तौर पर वही जिनमें सरकारी मुहर वाली प्रति निकाली जाती है।
- निःशुल्क सुविधाएँ (बिना लॉगिन):
- खसरा / खतौनी / बी-1 की पठनीय प्रति
- भू-भाग (Land Parcel) का इंटरैक्टिव नक्शा
- आबादी अधिकार अभिलेख (SVAMITVA योजना)
- स्कैन्ड पुराने अभिलेखागार दस्तावेज़
- RCMS के तहत राजस्व मामलों की स्थिति
- व्यवहार न्यायालय में लंबित भूमि विवाद
- ट्रांज़ैक्शन हिस्ट्री देखना
- व्यपवर्तन (डायवर्ज़न) की स्थिति
- व्यपवर्तन शुल्क की स्व-गणना
- बंधक/गिरवी जानकारी, CERSAI सर्च, जमानत विवरण
- शुल्क-आधारित सेवाएँ (लॉगिन ज़रूरी):
- डिजिटल साइन की हुई खसरा-खतौनी (कानूनी रूप से वैध)
- प्रमाणित भू-नक्शा प्रति
- राजस्व व सिविल कोर्ट के आदेश की मुहर वाली कॉपी
- अभिलेखागार के पुराने रिकॉर्ड्स की प्रमाणित कॉपी
- भू-अधिकार पुस्तिका (RoR)
- व्यपवर्तन के लिए ऑनलाइन आवेदन व भुगतान
- भू-राजस्व का सीधा भुगतान
- पोर्टल वॉलेट रिचार्ज
- आधार आधारित भूमिस्वामी E-KYC
| संबंधित गाइड्स |
| MP के सभी जिलों की पूरी सूची |
| पोर्टल से रिपोर्ट कैसे जनरेट करें |
| रजिस्ट्रेशन व लॉगिन की पूरी प्रक्रिया |
| MP भू-नक्शा निकालने का तरीक़ा |
| ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया |
शुरू करने से पहले — यह सब हाथ में रखें
पोर्टल खोलने से पहले अगर ये जानकारियाँ तैयार हैं तो काम 5 मिनट में हो जाएगा, वरना बार-बार रुक-रुक कर खोजना पड़ेगा। हमारे अनुभव में सबसे ज़्यादा लोग गाँव का सही नाम याद न होने की वजह से अटकते हैं — कागज़ात पर अक्सर हिंदी और अंग्रेज़ी स्पेलिंग में थोड़ा अंतर होता है।
- आपके ज़मीन का जिला, तहसील और गाँव का सटीक नाम
- खसरा संख्या या प्लॉट नंबर (पुरानी रसीद/बही पर मिल जाएगा)
- भूस्वामी का पूरा नाम जैसा रिकॉर्ड में दर्ज है (पिता का नाम भी)
- अगर है तो — 14 अंकों का ULPIN
- एक काम करने वाला मोबाइल नंबर (OTP के लिए, अगर रजिस्टर करना है)
- पेमेंट करने जा रहे हों तो — UPI/नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड
खसरा-खतौनी कैसे निकालें — पूरी प्रक्रिया
नया पोर्टल चार अलग-अलग तरीक़ों से रिकॉर्ड खोजने देता है। चारों के अंतिम स्क्रीन एक जैसे दिखते हैं, लेकिन शुरुआत का रास्ता थोड़ा अलग है। अगर आप पहली बार कर रहे हैं, तो खसरा संख्या वाला रास्ता सबसे तेज़ निकलता है, बशर्ते आपको नंबर पता हो।
- ब्राउज़र में webgis2.mpbhulekh.gov.in टाइप करें (Chrome या Edge बेहतर रहता है)
- होम पेज पर पहली टाइल — “भू-अभिलेख” — पर क्लिक करें
- एक पुष्टि बॉक्स आएगा — “क्या आप खसरा खोजना चाहते हैं?” — इसमें Yes दबा दें

- भाषा सेलेक्ट करें — हिंदी या English
- तीन ड्रॉपडाउन भरें — पहले जिला, फिर तहसील, फिर गाँव
- अब चार रेडियो बटन दिखेंगे — खोज का तरीक़ा चुनने के लिए:

- भूस्वामी (मालिक का नाम)
- खसरा संख्या
- प्लॉट संख्या
- ULPIN — नया विकल्प, सबसे तेज़
- नीचे दिख रहा कैप्चा कोड हू-ब-हू टाइप करें (बड़े-छोटे अक्षर का ध्यान रखें)
- “विवरण देखें” बटन दबाते ही ज़मीन की पूरी जानकारी खुल जाएगी
- “भूमि खंड विवरण” वाले हिस्से में जाकर “खतौनी देखें” के सामने आँख 👁️ का चिह्न दबाएँ — खतौनी PDF रूप में खुल जाएगी
तरीक़ा 1 — मालिक के नाम से खोजना
यह तरीक़ा तब काम आता है जब आपको खसरा या प्लॉट नंबर याद नहीं है, बस नाम पता है। थोड़ा धीमा है क्योंकि एक ही नाम के कई लोग गाँव में हो सकते हैं, इसलिए पिता का नाम मिलाकर ही सही रिकॉर्ड चुनें।
- “भूस्वामी” वाला रेडियो बटन सेलेक्ट करें
- “भूस्वामी चुनें” ड्रॉपडाउन में आपके चुने गए गाँव के सभी मालिकों की लिस्ट आ जाएगी — उसमें से अपना नाम ढूँढें
- संबंधित खसरा/प्लॉट नंबर पर टिक करें
- कैप्चा भरें, “विवरण देखें” दबाएँ
- “भूमि खंड विवरण” → “खतौनी देखें” के नीचे 👁️ आइकन क्लिक करें

तरीक़ा 2 — खसरा संख्या से खोजना
सबसे तेज़ और सबसे सटीक तरीक़ा। अगर पुराने टैक्स रसीद या बही में खसरा नंबर लिखा है तो बस वही डालें — एक क्लिक में रिकॉर्ड सामने।
- “खसरा संख्या” विकल्प पर टिक करें
- ड्रॉपडाउन से सही ब्लॉक/खसरा/प्लॉट चुनें
- कैप्चा डालकर “विवरण देखें” करें
- आगे का स्टेप पहले जैसा ही — आँख वाले आइकन से खतौनी ओपन करें
तरीक़ा 3 — प्लॉट नंबर से खोजना
शहरी इलाक़ों या नई बसी कॉलोनियों के लिए यह विकल्प ज़्यादा मुफ़ीद है, क्योंकि वहाँ खसरा से ज़्यादा प्लॉट नंबर चलन में रहता है।
- “प्लॉट संख्या” चुनें
- “प्लॉट चुनें” ड्रॉपडाउन से अपना नंबर सेलेक्ट करें
- कैप्चा भरकर “विवरण देखें” — “भूमि खंड विवरण” → 👁️ आइकन

तरीक़ा 4 — ULPIN से खोजना (नया फ़ीचर)
केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स पहल के तहत हर भूमि खंड को एक 14-अंकीय अनोखी पहचान संख्या दी जा रही है — यही है ULPIN (Unique Land Parcel Identification Number)। आप इसे “ज़मीन का आधार कार्ड” भी कह सकते हैं। एक बार जब आपकी ज़मीन को ULPIN मिल गया, फिर पूरे देश में कहीं भी आप उसी एक नंबर से रिकॉर्ड निकाल पाएँगे — गाँव, खसरा, मालिक का नाम याद रखने की ज़रूरत नहीं।
- खोज विकल्पों में “ULPIN” पर टिक करें
- 14 अंकों का नंबर बिना स्पेस के टाइप करें
- कैप्चा डालें, “विवरण देखें” — पूरा रिकॉर्ड एक झटके में सामने
इस पोर्टल से असली में क्या फ़ायदा?
क़िताबी फ़ायदे तो हर जगह लिखे मिलते हैं, लेकिन व्यावहारिक तौर पर देखें तो WebGIS 2.0 ने तीन-चार चीज़ें सच में बदली हैं:
- तहसील के दलालों का धंधा कम हुआ है — जो काम पहले 500–1000 रुपये “सेवा शुल्क” लेकर करते थे, वही अब 30 रुपये की सरकारी फ़ीस पर ख़ुद हो जाता है
- बैंक लोन के लिए नकल लाने का चक्कर ख़त्म — ज़्यादातर बैंक अब डिजिटल साइन वाली कॉपी सीधे स्वीकार करते हैं
- संदिग्ध बिक्री से बचाव — ख़रीदने से पहले आप एक मिनट में चेक कर सकते हैं कि बेचने वाला असल में मालिक है या नहीं
- पुश्तैनी ज़मीन का इतिहास — अभिलेखागार सेक्शन से 50–60 साल पुराने रिकॉर्ड भी निकाले जा सकते हैं
- विवादों में कोर्ट केस की तारीख़ ट्रैक करना — RCMS व व्यवहार न्यायालय मॉड्यूल से अब वकील को बार-बार फ़ोन नहीं करना पड़ता
- व्यपवर्तन शुल्क की पूर्व-गणना — कृषि से आवासीय कन्वर्ज़न पर कितना ख़र्च आएगा, यह पहले से पता चल जाता है
पोर्टल पर अकाउंट कैसे बनाएँ?
सिर्फ़ देखने के लिए कोई अकाउंट नहीं चाहिए। पर अगर आप डिजिटल साइन वाली कॉपी डाउनलोड करना चाहते हैं, राजस्व का भुगतान करना है, या E-KYC करनी है — तो रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है। प्रक्रिया हल्की-सी है, 3 मिनट का काम।
- webgis2.mpbhulekh.gov.in खोलें
- ऊपर दाएँ कोने में “पंजीकरण” लिंक पर क्लिक करें

- नाम, पता, मोबाइल और ईमेल भरें — मोबाइल वही दें जो आपके पास अभी है, OTP वहीं आएगा
- “OTP भेजें” दबाएँ — एक मिनट में 6-अंकीय कोड आ जाएगा, उसे डालकर वेरिफ़ाई करें
- एक अच्छा पासवर्ड चुनें (बैंक खाते जैसा मज़बूत), फॉर्म सबमिट कर दें — अकाउंट तैयार
भू-नक्शा (Bhu Naksha) ऑनलाइन कैसे देखें?
नक्शा देखने के लिए लॉगिन करने की कोई ज़रूरत नहीं — यह सेवा सबके लिए मुफ्त खुली हुई है। नया GIS-आधारित नक्शा पुराने वाले से बहुत बेहतर है क्योंकि इसमें सीमाएँ ज़ूम करने पर भी धुँधली नहीं होतीं।
- webgis2.mpbhulekh.gov.in पर जाएँ
- होम पेज पर “भू-भाग नक्शा” टाइल दबाएँ

- दो विकल्प मिलेंगे — “गाँव का नक्शा देखें” (मुफ्त) या “प्लॉट की प्रमाणित प्रति” (शुल्क सहित) — अपनी ज़रूरत वाला चुनें
- जिला, तहसील, गाँव — तीनों ड्रॉपडाउन भरें
- कैप्चा कोड डालकर “नक्शा देखें” क्लिक करें
- स्क्रीन पर पूरा गाँव का नक्शा खुल जाएगा — माउस से ज़ूम करें, अपना खसरा क्लिक करें, पूरी जानकारी पॉप-अप में आ जाएगी
- ऊपर दिए डाउनलोड आइकन से PDF/JPG में सेव कर लें
डिजिटल साइन की हुई कॉपी कैसे लें?
यह वो दस्तावेज़ है जिसे आप कोर्ट में, बैंक में, रजिस्ट्री ऑफ़िस में — कहीं भी जमा कर सकते हैं। IT Act 2000 की धारा 5 के तहत यह सरकारी कागज़ की मुहर वाली कॉपी जैसा ही वैध है। शुल्क प्रति प्रति लगभग 30 रुपये के आस-पास रहता है (वर्ष व प्रकार पर निर्भर)।
- पोर्टल पर अपनी ID-पासवर्ड से लॉगिन करें
- सेवा सूची से “भू-अभिलेख प्रतिलिपि” चुनें
- एक संदेश आएगा — “क्या आप वर्तमान/पूर्व वर्ष की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति चाहते हैं?” — YES करें
- जिला, तहसील, गाँव सेलेक्ट करें; फिर नाम/खसरा/प्लॉट/ULPIN में से किसी से रिकॉर्ड खोजें
- रिकॉर्ड का प्रकार (खसरा या खतौनी या बी-1) और साल चुनें
- “प्रतिलिपि शुल्क” बटन दबाएँ — पेमेंट पेज खुलेगा (वॉलेट, UPI, नेट बैंकिंग या कार्ड)
- भुगतान पूरा होते ही PDF डाउनलोड लिंक एक्टिव हो जाता है — उसे सेव कर लें, प्रिंट निकाल लें
RCMS व व्यवहार न्यायालय प्रकरण ट्रैक करना
WebGIS 2.0 की दो ऐसी सुविधाएँ हैं जो पुराने पोर्टल पर थीं ही नहीं। पहली — RCMS यानी Revenue Case Management System, जिसमें आप अपने राजस्व प्रकरण (नामांतरण, बँटवारा, सीमांकन) की स्थिति देख सकते हैं। दूसरी — व्यवहार न्यायालय प्रकरण, जो भूमि से जुड़े सिविल केस ट्रैक करने के लिए है।
- होम पेज पर “RCMS आदेश” या “व्यवहार न्यायालय प्रकरण” टाइल खोलें
- केस/प्रकरण नंबर डालें, या खसरा संख्या या भूस्वामी का नाम डालकर खोजें
- कैप्चा भरकर सबमिट करते ही — मामले की मौजूदा स्थिति, अगली पेशी की तारीख़ और जारी किए गए आदेश की प्रति दिख जाती है
व्यपवर्तन (Diversion) शुल्क की पूर्व-गणना
कृषि भूमि को आवासीय या व्यावसायिक उपयोग में बदलवाना हो तो उस पर सरकार को एक एकमुश्त शुल्क देना पड़ता है। पहले यह आँकड़ा तहसील जाकर ही पता चलता था। अब WebGIS 2.0 का कैलकुलेटर तीन-चार जानकारियाँ माँगकर मिनटों में अनुमान निकाल देता है।
- होम पेज पर “पुनर्निर्धारण (व्यपवर्तन) शुल्क कैलकुलेटर” टाइल पर क्लिक करें
- जिला, तहसील, गाँव, खसरा संख्या भरें
- वर्तमान भूमि उपयोग (कृषि) और प्रस्तावित उपयोग (आवासीय/व्यावसायिक/औद्योगिक) सेलेक्ट करें
- “शुल्क की गणना करें” — स्क्रीन पर अनुमानित राशि आ जाएगी जिसे आप योजना बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं
आम तौर पर आने वाली समस्याएँ और उनके समाधान
हमारी अपनी टेस्टिंग और पाठकों के सवालों के आधार पर — ये पाँच परेशानियाँ सबसे ज़्यादा सामने आती हैं। समाधान आम तौर पर सरल हैं, बस सही दिशा में सोचने की ज़रूरत है।
| समस्या | संभावित समाधान |
|---|---|
| पेज लोड नहीं हो रहा / सर्वर बिज़ी | शाम 6 बजे के बाद ट्रैफ़िक कम होता है — उस समय कोशिश करें। या Chrome की बजाय Edge/Firefox आज़माएँ। |
| कैप्चा बार-बार ग़लत बता रहा | बड़े-छोटे अक्षर, संख्या और स्पेस पर ध्यान दें। पेज रीफ़्रेश करके नया कैप्चा लाएँ। |
| OTP नहीं आ रहा | 2 मिनट इंतज़ार करें। नेटवर्क चेक करें। DND सर्विस बंद करें। फिर भी न आए तो दूसरा मोबाइल नंबर डालें। |
| नाम लिस्ट में नहीं मिल रहा | नाम रिकॉर्ड में जैसे लिखा हो वैसा देखें — हिंदी/अंग्रेज़ी स्पेलिंग, उपनाम का होना/न होना, पिता का नाम — सब मिलाकर खोजें। |
| भुगतान कट गया पर रिकॉर्ड नहीं मिला | घबराएँ नहीं। 24-48 घंटे में राशि वापस आ जाती है। न आए तो हेल्पडेस्क 18002030311 पर ट्रांज़ैक्शन ID सहित कॉल करें। |
| PDF डाउनलोड में डिजिटल साइन इनवैलिड दिख रहा | Adobe Reader में खोलें (ब्राउज़र में नहीं)। पहली बार खुलने पर साइन वेरिफ़ाई होने में कुछ सेकंड लगते हैं। |
फ़र्ज़ी वेबसाइटों से बचाव — एक ज़रूरी चेतावनी
“MP Bhulekh” नाम पर कई नक़ली वेबसाइट चल रही हैं जो रिकॉर्ड के नाम पर पैसा लेती हैं या बैंकिंग जानकारी चुराती हैं। हमेशा यह जाँच करें:
- URL में
.gov.inज़रूर हो — असली पता हैwebgis2.mpbhulekh.gov.in - एड्रेस बार में हरा/बंद ताला (HTTPS) दिखे
- भुगतान सिर्फ़ पोर्टल के अंदर ही करें — किसी ने व्हाट्सएप या ईमेल पर लिंक भेजा हो तो उस पर क्लिक न करें
- कोई आपको फ़ोन करके OTP माँगे — कभी मत दीजिए, चाहे वह “तहसीलदार ऑफ़िस से” बोले
- शक हो तो आधिकारिक हेल्पडेस्क 18002030311 पर पुष्टि करें
ज़रूरी लिंक एक नज़र में
| लिंक | विवरण |
|---|---|
| WebGIS 2.0 होम | आधिकारिक मुख्य पता — webgis2.mpbhulekh.gov.in |
| भू-नक्शा सेक्शन | GIS-आधारित गाँव का नक्शा देखें |
| लॉगिन / पंजीकरण | अकाउंट बनाएँ या मौजूदा अकाउंट से लॉगिन |
| नाम से खसरा खोज | भूस्वामी के नाम से रिकॉर्ड खोजना |
| ULPIN सर्च | 14 अंकीय यूनिक ID से तेज़ खोज |
| ऑनलाइन शिकायत | पोर्टल के “शिकायत” मेन्यू से समस्या रिपोर्ट |
संपर्क सूत्र (अद्यतन)
| क्या / कौन | विवरण |
|---|---|
| आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय | मोती महल, ग्वालियर, मध्य प्रदेश – 474007 |
| हेल्पडेस्क टोल-फ़्री | 18002030311 (समय: सुबह 09:45 — शाम 06:15) |
| पुराने वैकल्पिक नंबर | 18002336763, 07554000340 |
| तकनीकी सहायता ईमेल | [email protected] |
| आधिकारिक ईमेल | [email protected] |
आधार आधारित E-KYC कैसे करें?
अपने भूमि रिकॉर्ड को आधार से जोड़ने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि पहचान विवाद होने पर रिकॉर्ड साबित करना आसान हो जाता है। किसी फ़र्ज़ी ट्रांसफ़र की आशंका भी कम हो जाती है। प्रक्रिया इस तरह है:
- webgis2.mpbhulekh.gov.in पर लॉगिन करें (पंजीकरण ज़रूरी)
- सेवा मेन्यू से “भूमिस्वामी आधार E-KYC” खोलें
- जिला/तहसील/गाँव चुनकर — नाम, खसरा, प्लॉट या ULPIN से अपना रिकॉर्ड ढूँढें
- “विवरण देखें” करके सूची में से सही भूस्वामी पर टिक करें
- “E-KYC (भूमिस्वामी)” बटन दबाएँ
- 12-अंकीय आधार नंबर डालें, “OTP जनरेट करें” क्लिक करें
- आधार से लिंक मोबाइल पर आए OTP को डालकर फ़ॉर्म सबमिट कर दें — रिकॉर्ड आधार से जुड़ जाएगा
आबादी अधिकार अभिलेख क्या है?
गाँव में आबादी क्षेत्र (Lal Dora) में जो मकान बने हैं — उनकी मालिकी का रिकॉर्ड पहले लिखित रूप में नहीं था। केंद्र सरकार की SVAMITVA योजना के तहत ड्रोन सर्वे करके इन मकानों के डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए गए हैं, जो अब WebGIS 2.0 पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। देखने का तरीक़ा:
- webgis2.mpbhulekh.gov.in खोलें
- होम पेज पर “आबादी अधिकार अभिलेख” टाइल दबाएँ
- पुष्टि बॉक्स में Yes करें
- जिला, तहसील, गाँव चुनें और कैप्चा कोड डालें
- “विवरण देखें” क्लिक करते ही उस गाँव के सभी आबादी अभिलेख स्क्रीन पर दिखाई देंगे
पुराने स्कैन्ड दस्तावेज़ कैसे निकालें?
पुश्तैनी ज़मीन पर विवाद हो, या इतिहास खोजना हो — तो अभिलेखागार सेक्शन काम का है। आज़ादी से पहले के कुछ रिकॉर्ड भी यहाँ डिजिटाइज़्ड रूप में मौजूद हैं, हालाँकि उनकी पठनीयता पुराने काग़ज़ पर निर्भर करती है।
- webgis2.mpbhulekh.gov.in पर जाएँ
- होम पेज पर “अभिलेखागार दस्तावेज़ (स्कैन)” टाइल दबाएँ

- ज़रूरी जानकारियाँ डालें — जिला, तहसील, गाँव, रिकॉर्ड का प्रकार, खसरा संख्या आदि
- कैप्चा भरकर “विवरण देखें” दबाएँ
- उपलब्ध स्कैन्ड दस्तावेज़ों की सूची आ जाएगी — हर एक को क्लिक करके देखा जा सकता है, और PDF में सेव किया जा सकता है
पोर्टल पर शिकायत कैसे दर्ज करें?
रिकॉर्ड में नाम ग़लत है, खसरा नंबर मेल नहीं खा रहा, डिजिटल कॉपी डाउनलोड नहीं हो रही — किसी भी समस्या के लिए ऊपर के मेन्यू में दिए “शिकायत” टैब पर सीधे अनुरोध भेजा जा सकता है। आपको एक ट्रैकिंग नंबर मिलता है जिससे बाद में स्थिति देखी जा सकती है। हल आम तौर पर 7–15 कार्य दिवस में आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
MP Bhulekh WebGIS 2.0 क्या है और पुराने पोर्टल से कैसे अलग है?
WebGIS 2.0 मध्य प्रदेश सरकार के भू-अभिलेख विभाग का अपडेटेड पोर्टल है, जो webgis2.mpbhulekh.gov.in पर चलता है। पुराने वर्ज़न के मुक़ाबले इसमें इंटरैक्टिव GIS नक्शा, ULPIN-आधारित खोज, RCMS व सिविल कोर्ट केस ट्रैकिंग, और व्यपवर्तन शुल्क कैलकुलेटर — ये चार बड़े नए फ़ीचर जोड़े गए हैं।
क्या रिकॉर्ड देखने के लिए अकाउंट बनाना ज़रूरी है?
नहीं, सिर्फ़ देखने (View) के लिए कोई रजिस्ट्रेशन नहीं चाहिए। अकाउंट सिर्फ़ तब बनाना पड़ता है जब डिजिटल साइन वाली कॉपी डाउनलोड करनी हो, राजस्व का भुगतान करना हो, या आधार E-KYC जैसी सेवा लेनी हो।
ULPIN क्या है और क्या यह अनिवार्य है?
ULPIN एक 14-अंकीय अनोखी पहचान संख्या है जो हर भूमि खंड को मिलती है। इसे ज़मीन का आधार कार्ड भी कहते हैं। फ़िलहाल यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन सरकार धीरे-धीरे सभी रिकॉर्ड्स को ULPIN से जोड़ रही है, इसलिए नए ख़रीदारी या रजिस्ट्री में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
रिकॉर्ड में नाम ग़लत है — कैसे ठीक होगा?
दो रास्ते हैं। पहला, पोर्टल के “शिकायत” मेन्यू से ऑनलाइन सुधार आवेदन भेज दें। दूसरा, अपने तहसील कार्यालय में पटवारी से मिलकर लिखित आवेदन दें — मूल दस्तावेज़ साथ लेकर जाएँ। शुद्धि होने में आम तौर पर 15–30 दिन लग जाते हैं।
भू-नक्शा देखने में पैसा लगता है?
नहीं। गाँव का नक्शा देखना और सामान्य रूप से डाउनलोड करना पूरी तरह मुफ्त है। शुल्क सिर्फ़ तब लगता है जब आप मुहर/डिजिटल साइन वाली प्रमाणित प्रति माँगते हैं — जिसकी ज़रूरत आम तौर पर बैंक या कोर्ट के लिए ही पड़ती है।
डिजिटल साइन वाली कॉपी क्या वाक़ई कानूनी रूप से वैध है?
हाँ, बिल्कुल। IT Act 2000 की धारा 5 के तहत डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेज़ की वैधता मुहर वाली कागज़ी कॉपी जैसी ही होती है। बैंक, अदालतें, रजिस्ट्री विभाग और सरकारी कार्यालय — सब इसे स्वीकार करते हैं। बस एक बात — Adobe Reader में खोलकर देखें, ब्राउज़र में नहीं, ताकि साइन वेरिफ़िकेशन सही दिखे।
क्या मोबाइल से सब काम हो जाता है?
हाँ, पोर्टल मोबाइल-फ़्रेंडली है। Chrome या Edge ब्राउज़र पर अच्छे से चलता है। बस इतना ध्यान रखें — डिजिटल साइन वाली PDF देखने के लिए Adobe Reader ऐप ज़रूर रखें, क्योंकि बहुत से मोबाइल बिल्ट-इन रीडर साइन की पुष्टि नहीं करते।
भुगतान के बाद रिकॉर्ड न मिले तो क्या करें?
घबराने की ज़रूरत नहीं। 24–48 घंटे में राशि अपने आप वापस आ जाती है। अगर 3 दिन में भी रिफ़ंड न आए, तो हेल्पडेस्क 18002030311 पर ट्रांज़ैक्शन ID सहित कॉल करें या [email protected] पर ईमेल भेजें।
⚠️ अस्वीकरण: mpbhulekh.net एक स्वतंत्र सूचनात्मक वेबसाइट है। यह मध्य प्रदेश शासन की आधिकारिक वेबसाइट नहीं है। आधिकारिक भू-अभिलेख सेवाओं के लिए हमेशा webgis2.mpbhulekh.gov.in पर ही जाएँ। हम पोर्टल पर होने वाले बदलावों को नियमित रूप से ट्रैक करके इस गाइड को अपडेट करते रहते हैं। पिछली बार सत्यापित: 5 मई 2026।